Skip to main content

Geography B.A. 1st Year

 Geography B.A. 1st Year





 https://drive.google.com/file/d/11jNfFYGSfbf6GQdwDaSAdTNnsJ0eEQ5T/view?usp=drivesdkhttps://drive.google.com/file/d/11jNfFYGSfbf6GQdwDaSAdTNnsJ0eEQ5T/view?usp=drivesdk



https://drive.google.com/file/d/11qNJsCCnIGLiIdNb2xeNds5zFh2Y9Y9C/view?usp=drivesdk

Comments

Popular posts from this blog

समाजवाद का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत, विशेषताएं

समाजवाद का अर्थ, परिभाषा, सिद्धांत, विशेषताएं समाजवाद अंग्रेजी भाषा के सोशलिज्म (socialism) शब्द का हिन्दी पर्यायवाची है। सोशलिज्म शब्द की उत्पत्ति सोशियस socious शब्द से हु जिसका अर्थ समाज होता है। इस प्रकार समाजवाद का समबन्ध समाज और उसके सुधार से है। अर्थात समाजवाद मलू त: समाज से सम्बन्धित है और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना के लिए प्रयत्नशील है। समाजवाद शब्द मुख्य रूप से तीन अर्थो में प्रयुक्त किया जाता है - यह एक राजनीतिक सिद्धांत है।  यह एक राजनीतिक आंदोलन है।  इसका प्रयोग एक विशेष प्रकार की समाजिक व आर्थिक व्यवस्था के लिये किया जाता है।  समाजवाद की परिभाषा  वेकर कोकर के अनुसार -  ‘‘समाजवाद वह नीति या सिध्दांत है जिसका उददेश्य एक लोकतांत्रिक केन्द्रीय सत्ता द्वारा प्रचलित व्यवस्था की अपेक्षा धन का श्रेष्ठ कर वितरण और उसके अधीन रहते हुए धन का श्रेृठतर उत्पादन करना है।’’  बर्नार्ड शॉ के अनुसार -  ‘‘समाजवाद का अभिप्राय संपत्ति के सभी आधारभूत साधनो पर नियंत्रण से है। यह नियंत्रण समाजवाद के किसी एक वर्ग द्वारा न होकर स्वयं समाज के द्वारा होगा और धीरे...

हीगल, मार्क्स , भौतिकवाद और चेतनवाद

Bharatiya Sanvidhan Prastavana, The preamble of Indian Constitution

           भरतीय संविधान की प्रस्तावना “हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्त्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिये तथा इसके समस्त नागरिकों को:  सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,  विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,  प्रतिष्ठा और अवसर की समता  प्राप्त कराने के लिये तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता  तथा अखंडता सुनिश्चित करने वाली  बंधुता बढ़ाने के लिये  दृढ़ संकल्पित होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवंबर, 1949 ई. को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।” प्रस्तावना संविधान के परिचय अथवा भूमिका को कहते हैं भारतीय संविधान की प्रस्तावना पंडित नेहरू द्वारा पेश किये गए ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पर आधारित है।    42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा इसमें समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्दों को सम्मिलित किया गया। प्रस्तावना में उल्लेखित मुख्य शब्दों के अर्थ: हम भारत के लोग-   ...